नई दिल्ली । आगामी नवरात्रि, दीपावली और छठ पूजा के त्योहारी सीजन को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि त्योहारों के दौरान स्थानीय वेंडरों, फुटपाथ दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, फेरीवालों, कुम्हारों और अन्य छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से न हटाया जाए और न ही उनकी आजीविका प्रभावित की जाए।
आजीविका और मानवाधिकारों की रक्षा एनएचआरसी ने कहा है कि त्योहारी सीजन लाखों छोटे विक्रेताओं और पारंपरिक कारीगरों के लिए आय अर्जन का महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए दीये, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, फूल, रंगोली सामग्री, मिठाई, कपड़े तथा अन्य स्थानीय उत्पाद बेचने वाले वेंडरों की आजीविका और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी वेंडर को बिना वास्तविक आवश्यकता के हटाया न जाए, उसका सामान मनमाने ढंग से जब्त न किया जाए और न ही उस पर अनावश्यक जुर्माना अथवा दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
वैकल्पिक स्थान देना अनिवार्य आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि फायर सेफ्टी, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही या सार्वजनिक सुरक्षा के कारण किसी स्थान को खाली कराना अपरिहार्य हो, तो प्रशासन को संबंधित दुकानदारों और वेंडरों के लिए उचित, सुलभ तथा सुरक्षा उपायों से युक्त वैकल्पिक वेंडिंग स्थान उपलब्ध कराना होगा।
अर्थात, सुरक्षा के नाम पर किसी वेंडर को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखल नहीं किया जा सकेगा। आयोग का मानना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की आजीविका, दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उत्पीड़न और अवैध वसूली पर सख्त रुख एनएचआरसी ने वेंडरों के साथ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, अवैध वसूली, दबाव या अनुचित हस्तक्षेप की शिकायतों पर तत्काल जांच कराने और आवश्यक होने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने को कहा है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्थानीय प्रशासन ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के अनुरूप स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों, पारंपरिक व्यवसायों और छोटे विक्रेताओं को त्योहारों के दौरान बढ़ावा दे।
निर्देश क्यों जारी हुए? पिछले त्योहारी सीजन में कई शहरों से यह शिकायतें एनएचआरसी तक पहुंची थीं कि फुटपाथ दुकानदारों, कुम्हारों, हलवाइयों, मालियों, सब्जी विक्रेताओं और रंगोली रंग बेचने वालों को फायर ब्रिगेड अथवा एम्बुलेंस के रास्ते में बाधा बताकर चालान, जुर्माना, सामान जब्ती और उच्छेद का सामना करना पड़ा।
इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी पृष्ठभूमि में इस वर्ष त्योहारों से पूर्व ही आयोग ने सुरक्षात्मक निर्देश जारी किए हैं, ताकि वेंडरों को समय पर राहत मिल सके।
मुख्य सचिवों को लागू करने का दायित्व आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे इन निर्देशों को जिलाधिकारियों, नगर निगम अधिकारियों, नगर निकायों और पुलिस प्रशासन तक पहुंचाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
लंबित मामलों में अतिरिक्त अथवा पूर्ण कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report) 18 अक्टूबर 2026 तक एनएचआरसी को प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लिए मायने मध्य प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में यह निर्देश दिवाली और त्योहारी बाजारों में छोटे विक्रेताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। जबलपुर जैसे शहरों में दीये, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, फूल, रंगोली सामग्री और अन्य स्थानीय उत्पाद बेचने वाले वेंडरों को बिना वैध व सुरक्षा-आधारित कारण के न हटाया जाएगा। यदि किसी स्थान को सुरक्षा कारणों से खाली कराना आवश्यक हो, तो वेंडरों को उपयुक्त वैकल्पिक स्थान दिया जाएगा। इससे त्योहारों के दौरान छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी सुरक्षित रहने की उम्मीद बढ़ी है।
एनएचआरसी का यह निर्देश स्पष्ट संदेश देता है कि त्योहारों के दौरान छोटे वेंडरों की आजीविका उनका महत्वपूर्ण मानवाधिकार है। सार्वजनिक सुरक्षा के वास्तविक कारण होने पर स्थानांतरण संभव है, परंतु बिना वैकल्पिक स्थान, बिना उचित प्रक्रिया और बिना आवश्यकता के किसी वेंडर को बेदखल, प्रताड़ित या आर्थिक रूप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
जकार्ता/सुंडा जलडमरूमध्य। इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी ने सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में एक बार फिर अपनी ताकत का एहसास कराया। 4 सितंबर की रात शुरू हुई लगातार ज्वालामुखीय गतिविधि लगभग 25 घंटे तक चली और इसके बाद भी स्ट्रॉम्बोलियन शैली के छोटे विस्फोट दर्ज किए गए। ज्वालामुखीय राख का गुबार कुछ क्षेत्रों में करीब 50,000 फीट (लगभग 15.2 किलोमीटर) तक पहुंच गया, जिससे पश्चिमी इंडोनेशिया का हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इस घटना के चलते आठ हवाई अड्डों पर अस्थायी रूप से परिचालन रोका गया और हजारों उड़ानें रद्द या विलंबित हुईं। 7 सितंबर तक करीब 3,000 उड़ानों और लगभग 3.41 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। 8 सितंबर को राख का प्रभाव कम होने के बाद सभी प्रभावित हवाई अड्डों को दोबारा खोल दिया गया, हालांकि विमान संचालन को सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
25 घंटे तक जारी रहा लगातार विस्फोट
इंडोनेशिया के भूवैज्ञानिक प्राधिकरण के अनुसार अनाक क्राकाटोआ में लगातार चलने वाला विस्फोटक चरण 4 सितंबर 2026 को रात 11:07 बजे WIB शुरू हुआ और 6 सितंबर को 00:04 बजे समाप्त हुआ। यानी ज्वालामुखी करीब 25 घंटे तक लगातार सक्रिय रहा।
लगातार विस्फोट के बाद ज्वालामुखी फिर अपने अपेक्षाकृत सामान्य स्ट्रॉम्बोलियन पैटर्न में लौटता दिखाई दिया। 6 सितंबर तड़के 3:53 बजे करीब 30 सेकंड का एक और विस्फोट दर्ज किया गया। भूवैज्ञानिक एजेंसी ने बाद की गतिविधियों को भी लगातार निगरानी में रखा है।
भूवैज्ञानिक अधिकारियों के अनुसार लगातार चलने वाले लंबे विस्फोट के समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि ज्वालामुखी पूरी तरह शांत हो गया है। आगे भी विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।
50 हजार फीट तक पहुंची ज्वालामुखीय राख
इस विस्फोट का सबसे बड़ा प्रभाव ज्वालामुखीय राख के फैलाव के कारण सामने आया। राख का गुबार कुछ क्षेत्रों में लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। ऊंचाई पर मौजूद ज्वालामुखीय राख विमानन के लिए विशेष रूप से खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि यह विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को नुकसान पहुंचा सकती है।
राख के प्रसार ने जकार्ता तथा जावा और सुमात्रा के आसपास के क्षेत्रों में हवाई यातायात को प्रभावित किया। Reuters के अनुसार राख के कारण आठ हवाई अड्डों पर परिचालन बाधित हुआ और सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों पर बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुईं।
आठ हवाई अड्डों पर लगा अस्थायी ब्रेक
ज्वालामुखीय राख के कारण सुरक्षा के मद्देनजर आठ हवाई अड्डों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। इनमें जकार्ता का प्रमुख सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल था।
6 सितंबर तक 1,500 से अधिक उड़ानों और लगभग 1.70 लाख यात्रियों पर प्रभाव की जानकारी सामने आई थी। अगले दिन तक प्रभावित यात्रियों की संख्या करीब 3.41 लाख और रद्द या विलंबित उड़ानों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंच गई।
सिंगापुर एयरलाइंस और एयरएशिया समेत कई एयरलाइनों ने जकार्ता से संबंधित उड़ानों को रद्द या स्थगित किया। यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था और अस्थायी सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
8 सितंबर को राहत: सभी प्रभावित हवाई अड्डे फिर खुले
स्थिति में सुधार के बाद 8 सितंबर को इंडोनेशिया ने उन सभी हवाई अड्डों को फिर से खोल दिया जिन्हें ज्वालामुखीय राख के कारण बंद किया गया था। इसमें जकार्ता का प्रमुख सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है।
हालांकि अधिकारियों ने सावधानी बरतते हुए उन 178 विमानों का निरीक्षण करने की बात कही है जो राख के कारण परिचालन से बाहर रहे थे। परिवहन मंत्री डुडी पुरवागंधी ने संकेत दिया कि विमानों को दोबारा सेवा में लाने की प्रक्रिया के कारण कुछ विलंब जारी रह सकता है।
स्कूल बंद, मछली पकड़ने पर भी असर
ज्वालामुखीय राख के कारण प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर स्कूलों को अस्थायी रूप से दूरस्थ/ऑनलाइन शिक्षा की ओर जाना पड़ा। तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियां भी सावधानी के कारण प्रभावित हुईं।
अधिकारियों ने लोगों को राख के संपर्क से बचने, मास्क पहनने और स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा सलाह का पालन करने को कहा।
हालांकि इस बार स्थिति 2018 जैसी सुनामी आपदा में नहीं बदली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया गया और बड़े पैमाने पर अनिवार्य निकासी की स्थिति नहीं बनी।
‘क्राकाटोआ का पुत्र’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
अनाक क्राकाटोआ का इतिहास 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट से सीधे जुड़ा है। 1883 की घटना ने पुराने क्राकाटोआ ज्वालामुखीय परिसर के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया और समुद्री क्षेत्र में एक विशाल कैल्डेरा का निर्माण हुआ।
इसी ज्वालामुखीय परिसर से बाद में समुद्र के भीतर से नया ज्वालामुखीय द्वीप विकसित हुआ, जिसे अनाक क्राकाटोआ यानी ‘क्राकाटोआ का पुत्र’ कहा गया।
1883 की घटना के दौरान समुद्र में बड़े पैमाने पर भू-स्खलन और ज्वालामुखीय गतिविधि ने विनाशकारी सुनामी पैदा की थी। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अनाक क्राकाटोआ की हर बड़ी गतिविधि को अत्यधिक संवेदनशील बना देती है।
2018 की त्रासदी की याद फिर ताजा
अनाक क्राकाटोआ का नाम 22 दिसंबर 2018 की विनाशकारी सुनामी के कारण भी दुनिया भर में चर्चा में आया था। उस समय ज्वालामुखी के हिस्से के समुद्र में गिरने से सुनामी पैदा हुई और जावा तथा सुमात्रा के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई।
उस त्रासदी में 400 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों लोग घायल हुए। इसी कारण वर्तमान गतिविधि के दौरान भूवैज्ञानिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां ज्वालामुखी के साथ-साथ समुद्री परिस्थितियों पर भी लगातार नजर रख रही हैं।
अभी भी ‘लेवल III’ पर है अनाक क्राकाटोआ
लगातार 25 घंटे चले विस्फोट का चरण समाप्त हो चुका है, लेकिन इसका अर्थ खतरा पूरी तरह समाप्त होना नहीं है।
इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने अनाक क्राकाटोआ को अभी भी Level III — Alert/Siaga पर रखा है। अधिकारियों के अनुसार ज्वालामुखी में आगे भी विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।
सुरक्षा की दृष्टि से ज्वालामुखी के सक्रिय क्षेत्र के आसपास 3 किलोमीटर की निषिद्ध सीमा बनाए रखने की सलाह दी गई है। लोगों, पर्यटकों और अन्य लोगों को इस क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनी दी गई है।
दुनिया के लिए बड़ा सबक: छोटा द्वीप, बड़ा असर
अनाक क्राकाटोआ की ताजा गतिविधि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ज्वालामुखीय आपदा का प्रभाव केवल उसके आसपास रहने वाली आबादी तक सीमित नहीं रहता।
एक ज्वालामुखी से उठी राख हजारों फीट ऊपर पहुंचकर अंतरराष्ट्रीय विमानन मार्गों को प्रभावित कर सकती है। इस बार भी एक ज्वालामुखीय घटना ने जकार्ता के महत्वपूर्ण हवाई यातायात को बाधित किया और लाखों लोगों की यात्रा योजनाओं पर असर डाला।
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय गतिविधि वाले देशों में से एक है और यहां लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखी बताए जाते हैं। अनाक क्राकाटोआ इसी अत्यधिक सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र का हिस्सा है।
8 सितंबर की स्थिति: खतरा कम, निगरानी जारी
8 सितंबर तक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राख का प्रभाव कम होने के बाद प्रभावित हवाई अड्डे फिर खुल गए हैं और विमानन व्यवस्था को सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि ज्वालामुखी पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है और अधिकारियों ने आगे की गतिविधियों की संभावना को देखते हुए निगरानी जारी रखी है।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
– उड़ान से पहले संबंधित एयरलाइन और हवाई अड्डे की ताजा सूचना अवश्य जांचें। – उड़ान रद्द या विलंबित होने की स्थिति में एयरलाइन की आधिकारिक सूचना का पालन करें। – ज्वालामुखीय राख वाले क्षेत्रों में मास्क और आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें। – ज्वालामुखी के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करें। – सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सुनामी या विस्फोट संबंधी संदेशों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक एजेंसियों की सूचना देखें।
निष्कर्ष
अनाक क्राकाटोआ का 2026 का सितंबर विस्फोट प्रकृति की शक्ति और आधुनिक आपदा-प्रबंधन दोनों की एक बड़ी परीक्षा रहा।
25 घंटे तक चले लगातार विस्फोट, 50 हजार फीट तक पहुंची राख और लाखों यात्रियों पर पड़े विमानन प्रभाव ने यह दिखाया कि समुद्र के बीच स्थित अपेक्षाकृत छोटा ज्वालामुखी भी पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल हवाई अड्डे फिर खुल चुके हैं और लगातार चलने वाला बड़ा विस्फोटक चरण समाप्त हो गया है। लेकिन अनाक क्राकाटोआ अभी शांत नहीं माना जा सकता। उसका अलर्ट स्तर III बरकरार है और वैज्ञानिक निगरानी लगातार जारी है।
1883 की भयावह विरासत से जन्मा यह ‘अग्नि-पुत्र’ एक बार फिर दुनिया को याद दिला रहा है—ज्वालामुखी की शांति को कभी भी स्थायी शांति नहीं समझना चाहिए।
नई दिल्ली। देश के शराब उद्योग में इन दिनों सवाल केवल यह नहीं है कि बोतल में शराब कितनी तेज है, बल्कि यह भी है कि बोतल पर जो कहानी लिखी है, वह अंदर की हकीकत से कितनी मेल खाती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चुनिंदा व्हिस्की और रम उत्पादों के खिलाफ बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की है। नियामक की आपत्ति है कि कुछ उत्पादों में प्राकृतिक उत्पादन और maturation से विकसित होने वाले स्वाद तथा सुगंध की नकल करने के लिए artificial अथवा “nature-identical” flavouring substances का इस्तेमाल किया गया।
कार्रवाई की जद में United Spirits यानी Diageo India से जुड़े Antiquity Blue Whisky, Royal Challenge Whisky और McDowell’s No. 1 Rum, Inbrew Beverages के Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum तथा महाराष्ट्र में निर्मित Old Monk के तीन वेरिएंट जैसे लोकप्रिय नाम शामिल बताए गए हैं।
लेकिन यहां पहली और सबसे जरूरी बात साफ होनी चाहिए:
यह पूरे ब्रांडों पर देशव्यापी स्थायी प्रतिबंध नहीं है। कार्रवाई विशिष्ट उत्पादों और संबंधित विनिर्माण इकाइयों/उत्पादन पर केंद्रित है। इसलिए “Old Monk बंद”, “Royal Challenge बंद” या “Antiquity Blue पर पूर्ण प्रतिबंध” जैसी सुर्खियां तथ्य को जरूरत से ज्यादा बढ़ा सकती हैं।
बोतल वही, ब्रांड वही… मगर स्वाद आया कहां से? यहीं से पूरा विवाद दिलचस्प भी है और गंभीर भी।
FSSAI का कहना है कि प्रयोगशाला परीक्षणों में कुछ उत्पादों में बाहरी artificial या nature-identical flavouring substances पाए गए। नियामक का आरोप है कि इन पदार्थों का इस्तेमाल उस विशिष्ट स्वाद और सुगंध को पुनः पैदा करने के लिए किया गया, जो सामान्यतः संबंधित स्पिरिट के उत्पादन, प्राकृतिक अवयवों और maturation प्रक्रिया से विकसित होने की अपेक्षा होती है।
FSSAI ने कहा है कि उसे ऐसी कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य manufacturing practice ज्ञात नहीं है जिसमें रम में रम flavour या व्हिस्की में whisky flavour डालकर उसी मानक उत्पाद की characteristic taste और aroma तैयार की जाए।
यानी अब सवाल यह नहीं कि “शराब कितनी तेज है?”
सवाल यह है; “स्वाद उम्र और प्रक्रिया से आया है या फ्लेवर की शीशी से?”
और यहीं से मामला केवल शराब का नहीं, उत्पाद की पहचान और उपभोक्ता को दी जा रही जानकारी की विश्वसनीयता का बन जाता है।
क्या न्यूट्रल स्पिरिट का इस्तेमाल ही गैरकानूनी है? बिल्कुल नहीं इस विवाद को समझने के लिए यह तथ्य बेहद महत्वपूर्ण है।
FSSAI के Alcoholic Beverages Regulations में विभिन्न परिस्थितियों में whisky और rum के निर्माण में neutral/rectified spirit के इस्तेमाल का नियामकीय प्रावधान मौजूद है। इसलिए यह कहना कि “न्यूट्रल स्पिरिट से बनी हर व्हिस्की या रम गैरकानूनी है”, तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।
असल विवाद यह है कि: क्या बाहरी whisky/rum flavouring के सहारे किसी उत्पाद को उसी standard category—जैसे whisky या rum—के रूप में बेचा जा सकता है, और क्या उसकी लेबलिंग उपभोक्ता को उसकी वास्तविक प्रकृति के बारे में पर्याप्त और सही जानकारी देती है? यही वह बिंदु है जिस पर FSSAI और संबंधित कंपनियों के बीच कानूनी तथा नियामकीय टकराव पैदा हुआ है।
‘उम्र’ की कहानी भी अब जांच के घेरे में
विवाद का दूसरा और शायद अधिक संवेदनशील पहलू है—maturation और age claims।
FSSAI के नियमों में “matured” जैसे दावों के लिए निर्धारित शर्तें हैं। आधिकारिक नियमों में यह भी प्रावधान है कि “matured” कहे जाने वाले alcoholic beverage को निर्धारित अवधि तक oak या अन्य उपयुक्त लकड़ी के vats, barrels अथवा wooden chips के साथ maturation प्रक्रिया से गुजरना चाहिए।
अब नियामक ने कुछ उत्पादों में इस्तेमाल की गई matured spirit के अनुपात और लेबल पर किए गए age/maturation claims के बीच भी सवाल उठाए हैं।
और 8 अगस्त 2026 को सामने आई Reuters की रिपोर्ट के अनुसार FSSAI ने Diageo को Royal Challenge Whisky के “matured in American oak casks” दावे को लेकर भी चेतावनी दी है। नियामक का आरोप है कि उत्पाद का बड़ा हिस्सा non-matured grain neutral spirit है और blend में maturation claim को लेकर उपभोक्ता को भ्रमित करने की आशंका है। यह घटनाक्रम पूरे विवाद को और गंभीर बना देता है।
क्योंकि सवाल अब केवल “स्वाद कैसा है?” तक सीमित नहीं रहा।
सवाल यह भी है: “जिस उम्र और maturation की कहानी बोतल बता रही है, क्या बोतल के अंदर मौजूद blend उस दावे को पूरा करता है?”
FSSAI का रुख—नाम standard का, तो मानक भी standard के
नियामक का मूल तर्क यही दिखाई देता है कि यदि किसी उत्पाद को standard whisky या standard rum के रूप में बाजार में प्रस्तुत किया जा रहा है, तो वह उस category के निर्धारित food safety और labelling standards पर खरा उतरना चाहिए।
यदि किसी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति अलग है और उसका characteristic taste बाहरी flavouring से तैयार किया गया है, तो FSSAI का कहना है कि उसे उसी standard category के नाम से प्रस्तुत करना उपभोक्ता को भ्रमित कर सकता है।
नियामक ने कुछ ऐसे उत्पादों को “sub-standard” की श्रेणी में रखा है और यह सवाल उठाया है कि उन्हें standard whisky अथवा rum के रूप में क्यों बेचा जा रहा है।
उधर Diageo ने तत्काल चुनौती दी—कंपनी बोली, लेबल कानून के अनुरूप
FSSAI की कार्रवाई के बाद United Spirits ने नियामकीय रुख को चुनौती दी है।
कंपनी का कहना है कि संबंधित उत्पादों के labels भारत में लागू मौजूदा कानूनों और regulations के अनुरूप हैं तथा यह केवल उसकी कंपनी का नहीं बल्कि पूरे industry से जुड़ा विषय है। United Spirits ने अपने rum product से संबंधित FSSAI आदेश को अदालत में चुनौती देने की जानकारी भी दी है।
इसके अलावा, हालिया रिपोर्टों के अनुसार United Spirits ने FSSAI के flavouring order को लेकर High Court का दरवाजा खटखटाया है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि;
FSSAI के आरोप अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं और संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने तथा आदेश को चुनौती देने का पूरा अधिकार है।
Old Monk, Royal Challenge और Antiquity Blue—क्या सब बंद हो गए? उत्तर हैं, नहीं।
यह इस पूरे मामले की सबसे अधिक गलत समझी जा सकने वाली बात है।
कार्रवाई संबंधित चुनिंदा उत्पादों/वेरिएंट और उत्पादन पर केंद्रित है। लोकप्रिय ब्रांडों के कुछ विशिष्ट उत्पाद FSSAI की नियामकीय कार्रवाई के घेरे में हैं।
उपभोक्ताओं को भी इसी अंतर को समझना चाहिए।
शराब उद्योग के लिए यह सिर्फ एक ‘फ्लेवर विवाद’ नहीं
भारत का शराब बाजार करीब 40 अरब डॉलर का बताया गया है। ऐसे विशाल उद्योग में लोकप्रिय उत्पादों को लेकर FSSAI की इस तरह की कार्रवाई का प्रभाव केवल कुछ बोतलों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
यदि नियामक का दृष्टिकोण न्यायिक स्तर पर कायम रहता है, तो उद्योग को आगे चलकर:
– flavouring practices की समीक्षा, – manufacturing process में बदलाव, – maturation और age claims की पुनर्समीक्षा, – product classification में बदलाव, – labels पर अधिक स्पष्ट disclosure
जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।
अर्थात मामला कुछ बोतलों का हो सकता है, लेकिन नियामकीय संदेश पूरे उद्योग के लिए है।
FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर Alcoholic Beverages Regulations के कई संशोधन भी दर्ज हैं, जिनमें 2025 के संशोधन और जनवरी 2026 में प्रभावी हुए प्रावधान शामिल हैं।
व्यंग्य की एक घूंट… सवालों का पूरा पैग!
शराब की बोतल वर्षों से उपभोक्ता को कई कहानियां सुनाती रही है; कहीं “aged”, कहीं “matured”, कहीं “oak cask”, और कहीं परंपरा और शिल्प की लंबी कहानी।
लेकिन अब नियामक ने जैसे बोतल से ही पूछ लिया है; “कहानी अच्छी है, मगर सबूत कहां है?”
अगर स्वाद वास्तव में वर्षों की maturation से पैदा हुआ है तो सवाल ही नहीं।
लेकिन यदि प्राकृतिक प्रक्रिया की जगह flavouring से वही कहानी जल्दी तैयार की गई है, तो फिर उपभोक्ता के सामने सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है; बोतल में उम्र कितनी है और विज्ञापन में कितनी?
और अगर “matured” शब्द देखकर ग्राहक अतिरिक्त कीमत चुका रहा है, तो नियामक का यह पूछना भी जायज है कि—
“साहब, maturation शराब की हुई थी या सिर्फ marketing की?”
उपभोक्ता को आखिर मिलना क्या चाहिए—स्वाद या सच्चाई?
यह पूरा विवाद एक बुनियादी उपभोक्ता अधिकार की ओर ध्यान खींचता है; जिस उत्पाद के लिए ग्राहक पैसा दे रहा है, उसकी वास्तविक प्रकृति और उसकी पहचान के बारे में उसे सही जानकारी मिलनी चाहिए।
किसी उत्पाद में flavouring का होना अपने आप में हर परिस्थिति में अवैध होने का प्रमाण नहीं है। असली प्रश्न यह है कि कौन-सा flavour, किस category के उत्पाद में, किस नियामकीय अनुमति के तहत, किस मात्रा में और किस label के साथ इस्तेमाल किया गया है।
यही अंतर इस विवाद को सनसनी और तथ्य के बीच अलग करता है।
अब बोतल की चमक नहीं, लेबल की सच्चाई कसौटी पर
FSSAI की कार्रवाई भारतीय शराब उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण regulatory warning shot है। लेकिन इसे किसी एक ब्रांड की हार या किसी दूसरे ब्रांड की जीत के रूप में देखना इस पूरे विवाद को छोटा कर देना होगा।
असल प्रश्न कहीं बड़ा है; क्या भारत में alcoholic beverages के नाम, flavour, maturation, age और label claims के लिए एक समान, स्पष्ट और कठोर मानक लागू होंगे?
कंपनियां कह रही हैं कि वे मौजूदा कानूनों का पालन कर रही हैं।
नियामक कह रहा है कि कुछ उत्पाद standard category के अनुरूप नहीं हैं। अब अदालत और नियामकीय प्रक्रिया को यह तय करना है कि दोनों में से किसकी व्याख्या कानून की कसौटी पर टिकती है।
और तब तक एक बात बिल्कुल साफ है; शराब की बोतल में चाहे जितना आकर्षक स्वाद हो, उपभोक्ता के भरोसे में मिलावट की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
क्योंकि अंततः सवाल सिर्फ यह नहीं है कि; “गिलास में क्या है?”
सवाल यह भी है कि; “गिलास तक पहुंचने से पहले बोतल ने उपभोक्ता से क्या कहा था—और वह बात कितनी सच थी?” यही इस पूरे विवाद का असली पैगाम है।
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान–अमेरिका तनाव के बीच वर्तमान में एक नाजुक युद्ध-विराम कायम है, पर स्थायी समझौता अभी दूर दिखाई देता है। इस्लामाबाद के माध्यम से प्रस्तावित वार्ता प्रक्रिया ईरान द्वारा अस्वीकार कर दी गई, क्योंकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रखा है। 21 अप्रैल को Donald Trump ने युद्ध-विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया, लेकिन स्पष्ट संकेत दिया कि जब तक ईरान पूर्ण समझौता नहीं करता, तब तक दबाव की यह नीति जारी रहेगी।
इस पूरे संकट का केंद्र बिंदु बना हुआ है Hormuz जलडमरूमध्य, जहाँ ईरान ने रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखते हुए वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को गहराई से प्रभावित किया है। यातायात में 90% से अधिक व्यवधान और तेल कीमतों में अस्थिरता ने पूरी विश्व अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के दायरे में डाल दिया है।
ईरान का रुख सतही जिद नहीं, बल्कि एक सोची-समझी “असीमित युद्ध” रणनीति का हिस्सा है। वह सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए, ऊर्जा आपूर्ति की नब्ज पकड़कर अमेरिका को दीर्घकालिक संसाधन दबाव में खींच रहा है। ईरान यह भली-भांति समझता है कि पारंपरिक युद्ध में अमेरिका की बढ़त स्पष्ट है, लेकिन Hormuz जैसे रणनीतिक बिंदु पर नियंत्रण उसे ऐसी शक्ति देता है, जिससे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर एशियाई देशों, पर दबाव बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से अपने विरोधियों को कमजोर कर सकता है। उसकी रणनीति का मूल सिद्धांत स्पष्ट है, “समय मेरे पक्ष में है।”
दूसरी ओर, अमेरिका ने भी इस संकेत को समझते हुए प्रत्यक्ष युद्ध से दूरी बनाई है। युद्ध-विराम बढ़ाना दरअसल समय खरीदने की रणनीति है। एक तरफ ब्लॉकेड के माध्यम से दबाव बनाए रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पूर्ण सैन्य कार्रवाई से बचा जा रहा है। इसके पीछे ठोस कारण हैं: घरेलू स्तर पर घटती स्वीकृति दर, ईरान नीति को लेकर व्यापक असंतोष, और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण सहयोगी देशों (यूरोप, कनाडा, भारत) में बढ़ती नाराजगी। साथ ही, रूस-यूक्रेन और चीन जैसे अन्य मोर्चों पर भी अमेरिकी संसाधनों का दबाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़े वैश्विक परिवर्तन की ओर संकेत करता है। अमेरिका अब भी सैन्य और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली है, वह विश्व का प्रमुख ऊर्जा उत्पादक और सबसे मजबूत नौसैनिक शक्ति बना हुआ है, लेकिन उसका एकाधिकार समाप्त हो चुका है। दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय संतुलन की ओर बढ़ चुकी है, जहाँ शक्ति का खेल “भय” से नहीं, बल्कि “संतुलन” से संचालित हो रहा है।
ट्रंप की आक्रामक नीतियाँ, टैरिफ, प्रतिबंध, और दबाव आधारित कूटनीति ने सहयोगियों में भरोसे की जगह सतर्कता पैदा की है। यूरोपीय देश अब चीन, भारत और अन्य शक्तियों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को संतुलित कर रहे हैं। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और संसाधन-आधारित थकावट की रणनीति बन चुका है।
OPEC+ देश भी अब पूरी तरह अमेरिका-निर्भर नीति से हटकर अपने हितों की स्वतंत्र सुरक्षा कर रहे हैं। वहीं चीन और रूस बिना प्रत्यक्ष युद्ध में उतरे, आर्थिक, ऊर्जा और कूटनीतिक माध्यमों से अमेरिकी प्रभाव को धीरे-धीरे चुनौती दे रहे हैं। ईरान इस पूरे समीकरण में एक “संतुलन बिगाड़ने वाला कारक” बनकर उभरा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद रणनीतिक स्थानों के जरिए वैश्विक समीकरण प्रभावित कर रहा है।
इस पूरे परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण तत्व है, समय की सीमा। अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के तहत बंधे Donald Trump का कार्यकाल 2029 में समाप्त होना तय है। ऐसे में उनकी नीतियों में त्वरित परिणाम दिखाने और शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अपनी वैश्विक छवि को स्थापित करने की स्पष्ट अधीरता दिखाई देती है। उनकी सोच स्पष्ट है, “कमजोरी आक्रामकता को जन्म देती है”, लेकिन यही आक्रामकता अब सहयोगियों को भी दूरी बनाने पर मजबूर कर रही है।
भारत के हितों का विस्तृत एवं वर्तमान विश्लेषण
चीन-रूस-ईरान अमेरिका की निंदा कर रहे हैं, जबकि भारत और अरब देश संतुलित रुख अपनाए हुए हैं। भारत BRICS चेयर के रूप में मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभा रहा, बल्कि राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है। इससे ब्रिक्स में दरार जरूर आई है, पर वह समय के साथ मैनेज की जा सकती हैं। भारत ने किसी एक पक्ष का अंधानुकरण नहीं किया। “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” बरकरार है, यह hedging (जोखिम प्रबंधन) का उत्कृष्ट उदाहरण है। ईरान युद्ध और ट्रंप की आक्रामक नीति ने भारत को अल्पकालिक आर्थिक दबाव दिया है, लेकिन मल्टी-अलाइनमेंट और hedging की रणनीति ने इसे बड़े नुकसान से बचाया है। ऊर्जा विविधीकरण, चाबहार, रूसी तेल और मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था ने भारत को इस “बहुपक्षीय अखाड़े” में मजबूत स्थिति दी है। दीर्घकाल में यह संकट भारत के लिए अवसर भी साबित हो सकता है, यदि हम INSTC, Gulf साझेदारी और स्वदेशी उत्पादन को और मजबूत करें।
अंततः सत्य यही है कि अमेरिका अब भी सबसे शक्तिशाली राष्ट्र है, लेकिन दुनिया अब उसकी “जागीर” नहीं रही। यह एक ऐसे संक्रमण का दौर है जहाँ ईरान, चीन, रूस और OPEC+ जैसे खिलाड़ी मिलकर शक्ति-संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। और इस बहुध्रुवीय व्यवस्था में, हर निर्णय, चाहे वह युद्ध-विराम हो या टकराव अब वैश्विक शतरंज की एक चाल बन चुका है, जहाँ जीत किसी एक की नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाले की होगी।
बेंगलुरु, कर्नाटक । कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय न्यायपालिका के भविष्य, नैतिकता और स्वतंत्रता पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्पष्ट संदेश देते हुए Justice B. V. Nagarathna ने न्यायिक व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार, दबाव और तकनीकी निर्भरता को लेकर कठोर और बेबाक रुख अपनाया।
यह वक्तव्य “Reimagining the Judiciary in the Era of Artificial Intelligence” विषय पर आयोजित 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय न्यायिक अधिकारियों सम्मेलन में सामने आया, जिसमें Justice Surya Kant, Siddaramaiah, Justice Aravind Kumar सहित अनेक वरिष्ठ न्यायिक हस्तियां उपस्थित रहीं।
न्यायिक अखंडता पर दो टूक: “भ्रष्ट जजों को हटाना ही होगा”
जस्टिस नागरत्ना ने न्यायपालिका के भीतर स्व-शुद्धि (Self-Purification) की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा: “जो न्यायाधीश अपनी ज्ञात आय के भीतर जीवनयापन नहीं कर सकते और लालच के शिकार हो जाते हैं, उन्हें व्यवस्था से बाहर कर देना चाहिए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “किसी भी निर्णय में ‘समन्वय’ (coordination) की कोई गुंजाइश नहीं है। दागी निर्णय न्यायाधीश और पूरी न्यायपालिका पर एक स्थायी कलंक है।”
विधिक दृष्टि से महत्व: यह बयान Judicial Accountability और सुप्रीम कोर्ट के In-House Procedure के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही को और सख्ती से लागू करने की दिशा में संकेत देता है। साथ ही, 2nd National Judicial Pay Commission के तहत वेतन वृद्धि के बावजूद भ्रष्टाचार को “अस्वीकार्य” ठहराना न्यायिक नैतिकता की सर्वोच्च प्राथमिकता को दर्शाता है।
न्यायिक स्वतंत्रता: “दबाव से मुक्त रहना ही असली न्याय”
जस्टिस नागरत्ना ने न्यायाधीशों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा: “न्यायाधीश बाहरी दबावों या अपने सहयोगियों के प्रभाव से मुक्त रहें। उन्हें साहस और स्वतंत्रता विकसित करनी होगी।”
यह कथन भारतीय संविधान के मूल सिद्धांत Rule of Law और Independence of Judiciary को पुनः सुदृढ़ करता है।
AI पर ऐतिहासिक चेतावनी: “न्याय मशीन नहीं, जज ही देंगे”
AI के बढ़ते उपयोग पर उन्होंने संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाते हुए कहा: “न्याय का भविष्य AI से नहीं, बल्कि न्यायाधीशों से तय होगा — जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध होंगे।”
उन्होंने आगे कहा: “न्यायिक स्वतंत्रता में अब एल्गोरिदमिक प्रभाव से स्वतंत्रता भी शामिल है।”
गंभीर उदाहरण: उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने समक्ष आए एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें AI द्वारा “Mercy vs. Mankind” जैसे काल्पनिक। (non-existent) केस लॉ प्रस्तुत किए गए थे।
सुझाए गए सुधार: वकीलों द्वारा प्रस्तुत केस-लॉ का प्रमाणन (Certification) अनिवार्य हो। AI को केवल Peripheral Tool (सहायक उपकरण) के रूप में सीमित रखा जाए। न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में मानव विवेक (Human Judgement) सर्वोपरि रहे।
महिला न्यायाधीशों की सुरक्षा: संस्थागत संवेदनशीलता पर जोर
जस्टिस नागरत्ना ने महिला न्यायाधीशों के लिए सुरक्षित, गरिमामय और सक्षम कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा: “केवल संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं, बल्कि सुरक्षा, गरिमा और पूर्वाग्रह-मुक्त वातावरण भी अनिवार्य है।” यह बयान न्यायपालिका में Gender Justice और Institutional Accountability को मजबूती देता है।
उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी: अनुच्छेद 235 का पुनः स्मरण
उन्होंने Article 235 of the Constitution of India के तहत उच्च न्यायालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि: पदोन्नति, स्थानांतरण और अवकाश में पारदर्शिता व निष्पक्षता हो। रजिस्ट्री स्तर पर शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए। किसी भी न्यायिक अधिकारी को “अकेला छोड़ा गया” महसूस न होने दिया जाए। न्यायपालिका के लिए चेतावनी और दिशा दोनों।
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार यह भाषण केवल एक औपचारिक संबोधन नहीं, बल्कि भारतीय न्यायपालिका के लिए नीतिगत दिशा (Policy Direction) और आंतरिक चेतावनी (Institutional Warning) दोनों है।
प्रमुख विधिक प्रभाव: Judicial Ethics को लेकर सख्त रुख। AI Regulation in Judiciary की आवश्यकता को बल Accountability Mechanism को मजबूत करने का संकेत। e-Courts Project और भविष्य के Supreme Court Rules पर संभावित प्रभाव।
“स्वतंत्र, निष्पक्ष और मानवीय न्याय ही अंतिम लक्ष्य” जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का यह वक्तव्य स्पष्ट करता है कि: न्यायपालिका को तकनीक के साथ आगे बढ़ना है, परंतु तकनीक के अधीन नहीं होना है न्यायाधीशों को नैतिकता, साहस और संवैधानिक मूल्यों के साथ निर्णय लेना होगा और सबसे महत्वपूर्ण, “न्याय केवल इंसान देगा, मशीन नहीं।”
आलीराजपुर। आलीराजपुर से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला न्यायिक आदेश सामने आया है। जिला न्यायाधीश (द्वितीय) माननीय श्री आर.पी. सेवेतिया की अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को पारित अपने आदेश में आलीराजपुर स्टेट की विवादित पैतृक संपत्तियों के विक्रय, हस्तांतरण या किसी भी प्रकार के अंतरण पर 6 माह का सख्त स्टे लगा दिया है।
यह आदेश आदेश 39 नियम 1 एवं 2 सहपठित धारा 151 सीपीसी के तहत जारी किया गया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संरक्षण आवश्यक माना।
क्या है मामला, राजसी विरासत पर उत्तराधिकार का संघर्ष
यह पूरा विवाद आलीराजपुर स्टेट की ऐतिहासिक और जन उपयोगी संपत्तियों को लेकर है, जिनमें राजवाड़ा पैलेस परिसर और फतेह क्लब ग्राउंड जैसी धरोहर शामिल हैं।
आवेदकों का आरोप है कि एक संदिग्ध वसीयत (Will) के आधार पर राजस्व विभाग ने नामांतरण कर दिया, जिससे इन संपत्तियों को बेचने का रास्ता खुल गया। इससे आम जनता में भारी आक्रोश और चिंता थी कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर निजी हाथों में चली जाएगी।
आवेदकों का पक्ष, HUF संपत्ति का दावा
आवेदक उदयभान सिंह (33) एवं चंद्रभान सिंह (29), जो स्व. महेंद्र प्रताप सिंह राठौर के पुत्र हैं, ने दावा किया कि:
यह सम्पूर्ण संपत्ति संयुक्त हिंदू परिवार (HUF) की अविभाजित पैतृक संपत्ति है पूर्व महाराजा प्रतापसिंह जी के चार पुत्रों में समान हिस्सेदारी थी उनके अनुसार, माधवसिंह की शाखा को भी वैधानिक हिस्सा मिलना चाहिए वर्ष 2025 में उन्हें जानकारी मिली कि तुषार सिंह ने कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर 2022 की वसीयत के आधार पर संपत्ति पर कब्जा कर लिया
अनावेदक तुषार सिंह का पक्ष
अनावेदक तुषार सिंह (53, देवगढ़, दाहोद) ने अपने पक्ष में कहा: यह संपत्ति महाराजा सुरेन्द्रसिंह की व्यक्तिगत संपत्ति थी भारत सरकार के साथ हुए विलय अनुबंध के तहत यह उन्हें प्राप्त हुई उन्होंने यह संपत्ति कमलेन्द्रसिंह से वैध वसीयत के आधार पर प्राप्त की अतः वे इसके एकमात्र वैध स्वामी हैं कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि संपत्ति का हस्तांतरण हुआ तो: नए पक्षकार जुड़ेंगे मुकदमा जटिल होगा न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी इसलिए यथास्थिति बनाए रखना अनिवार्य है।
आदेश की प्रमुख विशेषताएं केवल अनावेदक क्रमांक 1 (तुषार सिंह) पर लागू अवधि: 6 माह (स्वतः समाप्ति के साथ) आवश्यकता पड़ने पर आवेदक पुनः आवेदन कर सकते हैं अन्य पक्षकारों के विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही जारी यह अंतरिम राहत है, अंतिम निर्णय अभी शेष
जनता में खुशी की लहर
इस प्रारंभिक निर्णय के बाद शहर में राहत और खुशी का माहौल है। स्थानीय सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों ने इसे जनहित और धरोहर संरक्षण की बड़ी जीत बताया।
स्टे की ख़बर से जिला मुख्यालय आलीराजपुर के जागरूक नागरिक मंच अध्यक्ष विक्रम सेन, पूर्व भाजपा अध्यक्ष किशोर शाह, पार्षद संतोष थेपड़िया, समाजसेवी आशुतोष पंचोली, मुस्तफा बोहरा, पर्वत सिंह राठौर, एडवोकेट राजेश राठौर, गिरिराज मोदी, राजेंद्र टवली, निलेश जैन, गोविंदा गुप्ता, शहर काजी सैयद हनीफ मियां, संजय तोमर, राजेंद्र भाई पटेल, सादिक चंदेरी, दीपक दीक्षित, किशन राठौड़, ललित मोदी और सुरेश सारडा जैसे प्रतिनिधियों ने इसे धरोहर रक्षा की जीत बताया। अगले 6 महीनों में दोनों पक्षों को दावे सिद्ध करने होंगे, जो आलीराजपुर की राजसी विरासत का भविष्य तय करेगा।
कानूनी आधार और प्रभाव कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टे स्वतः समाप्त होगा, लेकिन आवेदक पुनः आवेदन कर सकते हैं; अन्य पक्षकारों पर एकपक्षीय कार्यवाही जारी रहेगी। यह आदेश अंतिम निर्णय तक धरोहर को सुरक्षित रखेगा, जिसमें HUF बनाम व्यक्तिगत स्वामित्व का निर्धारण होगा। आलीराजपुर की 15वीं शताब्दी से चली आ रही रियासत की यह संपत्ति, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है, अब दस्तावेजी साक्ष्यों पर तय होगी।
इस केस की पैरवी इंदौर के सुप्रसिद्ध वकील श्री अभिनव मल्होत्रा कर रहें हैं।
उपरोक्त जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जागरूक नागरिक मंच के अध्यक्ष विक्रम सेन ने दी।
धार। जिले में ठगों ने बेहद शातिर तरीके से खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताकर एक ठेकेदार के घर फर्जी छापेमारी की और कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये के जेवर और नकदी लेकर फरार हो गए। घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार यह वारदात धार जिले के बाग क्षेत्र स्थित ब्राह्मण मोहल्ले में हुई। यहां एमपीईबी के ठेकेदार राजकुमार मालवीय के घर शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक बिना नंबर की स्कॉर्पियो आकर रुकी। वाहन से पांच लोग उतरे, जिनमें से दो खाकी वर्दी में थे। जबकि, तीन सामान्य कपड़ों में थे। उन्होंने खुद को आयकर विभाग की टीम बताते हुए घर का दरवाजा खटखटाया और ब्लैक मनी की शिकायत मिलने का हवाला देकर तलाशी लेने की बात कही।
परिवार को कमरे में बैठाकर, मोबाइल छीने परिवार को लगा कि वास्तव में आयकर विभाग की टीम आई है, इसलिए उन्हें अंदर आने दिया गया। घर में प्रवेश करते ही कथित अधिकारियों ने पूरे घर की तलाशी शुरू कर दी। पीड़िता कृष्णा मालवीय के मुताबिक आरोपियों ने अलमारी की चाबी अपने पास ले ली और अलग-अलग कमरों में जाकर सामान देखने लगे। इस दौरान उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को एक कमरे में बैठा दिया और उनके मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए, ताकि कोई बाहर सूचना न दे सके।
तलाशी के बहाने 50 तोला सोना और 4 लाख ले गए करीब पंद्रह मिनट तक घर में तलाशी लेने का नाटक करने के बाद आरोपियों ने अलमारी से करीब 50 तोला सोने के जेवर और चार लाख रुपए नकद निकाल लिए। इसके बाद वे तेजी से बाहर निकले और स्कॉर्पियो में बैठकर फरार हो गए। जब कुछ देर बाद परिवार को शक हुआ और उन्होंने आसपास जानकारी ली, तब पता चला कि कोई भी आधिकारिक टीम इलाके में नहीं आई थी।
अज्ञात बदमाशों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि वाहन और आरोपियों की पहचान हो सके। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में इस तरह की घटनाएं देश के कई हिस्सों में सामने आई हैं, जहां ठग खुद को आयकर, पुलिस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को झांसा देते हैं और तलाशी के बहाने लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। कई बार वे नकली पहचान पत्र और वर्दी का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं। धार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर घर में तलाशी लेने आए तो पहले उसकी पहचान और आधिकारिक आदेश की पुष्टि जरूर करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दें, ताकि इस तरह के गिरोहों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इंदौर। 15 साल का छात्र संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होकर घर से निकल गया। बुधवार से लापता इस छात्र का दूसरे दिन शुक्रवार को भी कोई सुराग नहीं मिला। खजराना पुलिस ने मामले में गुमशुदगी दर्ज कर यूपी पुलिस और जीआरपी को सूचना भेज दी है। छात्र कृष्ण विहार कॉलोनी का रहने वाला है। वह घर से क्रिकेट खेलने निकला था, लेकिन देर शाम तक नहीं लौटा। परिवार ने आसपास तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में घर में उसके द्वारा लिखा पत्र मिला, जिसके बाद गुरुवार को परिजन थाने पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना छात्र ने पत्र में मां-पिता, भाई और दादा को संबोधित करते हुए लिखा कि वह अपने असली परिवार के पास जा रहा है। उसने परिवार से रोने या उसे ढूंढने की कोशिश न करने की बात भी कही। वह घर किसी डांट-फटकार या खराब रिजल्ट की वजह से नहीं छोड़ रहा, बल्कि उसे अपनी असलियत का पता चल गया है। उसने कहा कि यदि परिवार उस असलियत को जानना चाहता है, तो उसके फोटो पर लिखे संत प्रेमानंद महाराज के वचनों को पढ़े। छात्र ने बताया कि उसने दोस्त से 500 रुपए उधार लिए हैं, जिसे परिवार लौटा दे। अंत में उसने जय माता दी लिखकर पत्र समाप्त किया।
रोज दो घंटे करता था पूजा परिजनों के मुताबिक छात्र धार्मिक प्रवृत्ति का था। वह रोज दो घंटे पूजा-पाठ करता था और शाम को डेढ़ से दो घंटे तक मंदिर में रुकता था। वह अक्सर संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखता था। जांच के दौरान पुलिस को छात्र के मोबाइल की गूगल हिस्ट्री में देहरादून जाने वाली ट्रेन के बारे में सर्च करने की जानकारी मिली है। इसके अलावा उसके इंस्टाग्राम अकाउंट में भी धार्मिक भजन और प्रवचन देखे गए।
सीसीटीवी में अकेला जाता दिखा घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में छात्र अकेले जाते हुए दिखाई दिया है। पुलिस ने आसपास के इलाकों में तलाश शुरू कर दी है। परिवार ने रिश्तेदारों को भी सूचना दी है। पिता अनिल के अनुसार बेटे का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा पहले मथुरा में पढ़ाई कर चुका है, इसलिए उसे वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जानकारी लेने भेजा जा रहा है।