


विक्रम सेन
जकार्ता/सुंडा जलडमरूमध्य। इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी ने सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में एक बार फिर अपनी ताकत का एहसास कराया। 4 सितंबर की रात शुरू हुई लगातार ज्वालामुखीय गतिविधि लगभग 25 घंटे तक चली और इसके बाद भी स्ट्रॉम्बोलियन शैली के छोटे विस्फोट दर्ज किए गए। ज्वालामुखीय राख का गुबार कुछ क्षेत्रों में करीब 50,000 फीट (लगभग 15.2 किलोमीटर) तक पहुंच गया, जिससे पश्चिमी इंडोनेशिया का हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इस घटना के चलते आठ हवाई अड्डों पर अस्थायी रूप से परिचालन रोका गया और हजारों उड़ानें रद्द या विलंबित हुईं। 7 सितंबर तक करीब 3,000 उड़ानों और लगभग 3.41 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। 8 सितंबर को राख का प्रभाव कम होने के बाद सभी प्रभावित हवाई अड्डों को दोबारा खोल दिया गया, हालांकि विमान संचालन को सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
25 घंटे तक जारी रहा लगातार विस्फोट
इंडोनेशिया के भूवैज्ञानिक प्राधिकरण के अनुसार अनाक क्राकाटोआ में लगातार चलने वाला विस्फोटक चरण 4 सितंबर 2026 को रात 11:07 बजे WIB शुरू हुआ और 6 सितंबर को 00:04 बजे समाप्त हुआ। यानी ज्वालामुखी करीब 25 घंटे तक लगातार सक्रिय रहा।
लगातार विस्फोट के बाद ज्वालामुखी फिर अपने अपेक्षाकृत सामान्य स्ट्रॉम्बोलियन पैटर्न में लौटता दिखाई दिया। 6 सितंबर तड़के 3:53 बजे करीब 30 सेकंड का एक और विस्फोट दर्ज किया गया। भूवैज्ञानिक एजेंसी ने बाद की गतिविधियों को भी लगातार निगरानी में रखा है।
भूवैज्ञानिक अधिकारियों के अनुसार लगातार चलने वाले लंबे विस्फोट के समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि ज्वालामुखी पूरी तरह शांत हो गया है। आगे भी विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।
50 हजार फीट तक पहुंची ज्वालामुखीय राख
इस विस्फोट का सबसे बड़ा प्रभाव ज्वालामुखीय राख के फैलाव के कारण सामने आया। राख का गुबार कुछ क्षेत्रों में लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। ऊंचाई पर मौजूद ज्वालामुखीय राख विमानन के लिए विशेष रूप से खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि यह विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को नुकसान पहुंचा सकती है।
राख के प्रसार ने जकार्ता तथा जावा और सुमात्रा के आसपास के क्षेत्रों में हवाई यातायात को प्रभावित किया। Reuters के अनुसार राख के कारण आठ हवाई अड्डों पर परिचालन बाधित हुआ और सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों पर बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुईं।
आठ हवाई अड्डों पर लगा अस्थायी ब्रेक
ज्वालामुखीय राख के कारण सुरक्षा के मद्देनजर आठ हवाई अड्डों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। इनमें जकार्ता का प्रमुख सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल था।
6 सितंबर तक 1,500 से अधिक उड़ानों और लगभग 1.70 लाख यात्रियों पर प्रभाव की जानकारी सामने आई थी। अगले दिन तक प्रभावित यात्रियों की संख्या करीब 3.41 लाख और रद्द या विलंबित उड़ानों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंच गई।
सिंगापुर एयरलाइंस और एयरएशिया समेत कई एयरलाइनों ने जकार्ता से संबंधित उड़ानों को रद्द या स्थगित किया। यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था और अस्थायी सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
8 सितंबर को राहत: सभी प्रभावित हवाई अड्डे फिर खुले
स्थिति में सुधार के बाद 8 सितंबर को इंडोनेशिया ने उन सभी हवाई अड्डों को फिर से खोल दिया जिन्हें ज्वालामुखीय राख के कारण बंद किया गया था। इसमें जकार्ता का प्रमुख सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है।
हालांकि अधिकारियों ने सावधानी बरतते हुए उन 178 विमानों का निरीक्षण करने की बात कही है जो राख के कारण परिचालन से बाहर रहे थे। परिवहन मंत्री डुडी पुरवागंधी ने संकेत दिया कि विमानों को दोबारा सेवा में लाने की प्रक्रिया के कारण कुछ विलंब जारी रह सकता है।
स्कूल बंद, मछली पकड़ने पर भी असर
ज्वालामुखीय राख के कारण प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर स्कूलों को अस्थायी रूप से दूरस्थ/ऑनलाइन शिक्षा की ओर जाना पड़ा। तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियां भी सावधानी के कारण प्रभावित हुईं।
अधिकारियों ने लोगों को राख के संपर्क से बचने, मास्क पहनने और स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा सलाह का पालन करने को कहा।
हालांकि इस बार स्थिति 2018 जैसी सुनामी आपदा में नहीं बदली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया गया और बड़े पैमाने पर अनिवार्य निकासी की स्थिति नहीं बनी।
‘क्राकाटोआ का पुत्र’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
अनाक क्राकाटोआ का इतिहास 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट से सीधे जुड़ा है। 1883 की घटना ने पुराने क्राकाटोआ ज्वालामुखीय परिसर के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया और समुद्री क्षेत्र में एक विशाल कैल्डेरा का निर्माण हुआ।
इसी ज्वालामुखीय परिसर से बाद में समुद्र के भीतर से नया ज्वालामुखीय द्वीप विकसित हुआ, जिसे अनाक क्राकाटोआ यानी ‘क्राकाटोआ का पुत्र’ कहा गया।
1883 की घटना के दौरान समुद्र में बड़े पैमाने पर भू-स्खलन और ज्वालामुखीय गतिविधि ने विनाशकारी सुनामी पैदा की थी। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अनाक क्राकाटोआ की हर बड़ी गतिविधि को अत्यधिक संवेदनशील बना देती है।
2018 की त्रासदी की याद फिर ताजा
अनाक क्राकाटोआ का नाम 22 दिसंबर 2018 की विनाशकारी सुनामी के कारण भी दुनिया भर में चर्चा में आया था। उस समय ज्वालामुखी के हिस्से के समुद्र में गिरने से सुनामी पैदा हुई और जावा तथा सुमात्रा के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई।
उस त्रासदी में 400 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों लोग घायल हुए। इसी कारण वर्तमान गतिविधि के दौरान भूवैज्ञानिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां ज्वालामुखी के साथ-साथ समुद्री परिस्थितियों पर भी लगातार नजर रख रही हैं।
अभी भी ‘लेवल III’ पर है अनाक क्राकाटोआ
लगातार 25 घंटे चले विस्फोट का चरण समाप्त हो चुका है, लेकिन इसका अर्थ खतरा पूरी तरह समाप्त होना नहीं है।
इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने अनाक क्राकाटोआ को अभी भी Level III — Alert/Siaga पर रखा है। अधिकारियों के अनुसार ज्वालामुखी में आगे भी विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।
सुरक्षा की दृष्टि से ज्वालामुखी के सक्रिय क्षेत्र के आसपास 3 किलोमीटर की निषिद्ध सीमा बनाए रखने की सलाह दी गई है। लोगों, पर्यटकों और अन्य लोगों को इस क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनी दी गई है।
दुनिया के लिए बड़ा सबक: छोटा द्वीप, बड़ा असर
अनाक क्राकाटोआ की ताजा गतिविधि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ज्वालामुखीय आपदा का प्रभाव केवल उसके आसपास रहने वाली आबादी तक सीमित नहीं रहता।
एक ज्वालामुखी से उठी राख हजारों फीट ऊपर पहुंचकर अंतरराष्ट्रीय विमानन मार्गों को प्रभावित कर सकती है। इस बार भी एक ज्वालामुखीय घटना ने जकार्ता के महत्वपूर्ण हवाई यातायात को बाधित किया और लाखों लोगों की यात्रा योजनाओं पर असर डाला।
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय गतिविधि वाले देशों में से एक है और यहां लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखी बताए जाते हैं। अनाक क्राकाटोआ इसी अत्यधिक सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र का हिस्सा है।
8 सितंबर की स्थिति: खतरा कम, निगरानी जारी
8 सितंबर तक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राख का प्रभाव कम होने के बाद प्रभावित हवाई अड्डे फिर खुल गए हैं और विमानन व्यवस्था को सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि ज्वालामुखी पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है और अधिकारियों ने आगे की गतिविधियों की संभावना को देखते हुए निगरानी जारी रखी है।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
– उड़ान से पहले संबंधित एयरलाइन और हवाई अड्डे की ताजा सूचना अवश्य जांचें।
– उड़ान रद्द या विलंबित होने की स्थिति में एयरलाइन की आधिकारिक सूचना का पालन करें।
– ज्वालामुखीय राख वाले क्षेत्रों में मास्क और आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
– ज्वालामुखी के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करें।
– सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सुनामी या विस्फोट संबंधी संदेशों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक एजेंसियों की सूचना देखें।
निष्कर्ष
अनाक क्राकाटोआ का 2026 का सितंबर विस्फोट प्रकृति की शक्ति और आधुनिक आपदा-प्रबंधन दोनों की एक बड़ी परीक्षा रहा।
25 घंटे तक चले लगातार विस्फोट, 50 हजार फीट तक पहुंची राख और लाखों यात्रियों पर पड़े विमानन प्रभाव ने यह दिखाया कि समुद्र के बीच स्थित अपेक्षाकृत छोटा ज्वालामुखी भी पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल हवाई अड्डे फिर खुल चुके हैं और लगातार चलने वाला बड़ा विस्फोटक चरण समाप्त हो गया है। लेकिन अनाक क्राकाटोआ अभी शांत नहीं माना जा सकता। उसका अलर्ट स्तर III बरकरार है और वैज्ञानिक निगरानी लगातार जारी है।
1883 की भयावह विरासत से जन्मा यह ‘अग्नि-पुत्र’ एक बार फिर दुनिया को याद दिला रहा है—ज्वालामुखी की शांति को कभी भी स्थायी शांति नहीं समझना चाहिए।

Leave a Reply